जयबाण तोप का इतिहास

जयबाण तोप का इतिहास और जुड़ी कहानी !

जब भारत मे विदेशी आक्रमदकरियो का खतरा बढ़ता जा रहा था ।सवाई जयसिंह द्वितीय ने अपने किले और परिधि की सुरक्षा के लिये कुछ कदम उठाए । जयबाण तोप का निर्माण भी सुरक्षा चक्र को ध्यान मे रखते हुए किया गया । जयबाण तोप का इतिहास

इतिहास के राजाओं का जिक्र होता है । फिर जिक्र होता है युद्ध का और फिर जिक्र आता है उस वक़्त के हथियारों का । जयबाण तोप का इतिहास गौरव से भरा हुआ है । इस तोप को एशिया की सबसे बड़ी तोप का दर्जा भी प्राप्त है ।1720 मे जयगढ़ के किले के विशेष कारखाने मे तैयार की गई जयबाण तोप का इतिहास और निर्माण दोनो ही बड़े रोचक है । उस वक़्त के दौर मे इस तोप का इतना खौफ था कि दुश्मनो के लिए भारी चुनौती बन गयी थी । जयबाण तोप का इतिहास

जयबाण तोप का इतिहास विवरण !

  • विवरण ‘जयबाण तोप’ राजस्थान के जयपुर में जयगढ़ क़िले में स्थित है। यह विश्व की सबसे बड़ी तोप है।
  • राज्य राजस्थान शहर जयपुर
  • निर्माणकर्ता सवाई जयसिंह द्वितीय निर्माण काल 1720 ई.
  • लंबाई लंबाई 20 फीट, 2 इंच
  • वज़न 50 टन
  • मारक क्षमता 22 मील अन्य जानकारी जयबाण तोप की ढलाई1720 ई. के आसपास की गई थी। इसको एक बार चलाने के लिए क़रीब 100 कि.ग्रा. गन पाउडर की ज़रूरत पड़ती थी।

जयबाण तोप का इतिहास मे निर्माण और परीक्षण !

निर्माण के बाद जब इस तोप का परीक्षण किया गया तो उसकी निशानी आज भी मौजूद है । जब तोप के परीक्षण मे गोला दागा गया तो वो 35 किलोमीटर की दूरी करके जहां गिरा वहाँ एक तलाबनुमा गड्ढा कर दिया । औऱ वो गड्ढा आज भी तालाब के रूप मे इस्तेमाल हो रहा है । जयबाण तोप का इतिहास

जयबाण तोप की लंबाई की बात करे तो 31 फ़ीट 3 इंच है और ये तोप 50 टन वजनी है । 35 किलोमीटर तक मारक क्षमता रखने वाली इस तोप को एक बार मे 100 किलो गनपाउडर की जरूरत पड़ती है । निर्माण के बाद इतना अधिक वजनी होने के वजह से इसे महल से कभी निकाला नही गया और ना ही किसी युद्ध मे इस्तेमाल किया गया ।

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